अमेरिका से उच्च शिक्षा पाने वाले विदेशी कामगारों को मौका देने के तहत ट्रम्प प्रशासन ने बुधवार को एच-1बी वीजा आवेदन से संबंधित नई नीति की औपचारिक घोषणा की है। कहा गया है कि नई नीति ज्यादा सक्षम, प्रभावी है और यह योग्य लोगों को अमेरिका में आकर्षित करने में कामयाब रहेगी। अंतिम नियम उस आदेश को पलट देगा जिसके अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) नियमित कैप और एडवांस डिग्री छूट के तहत एच-1बी अर्जियों का चयन करती थी।
फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होंगे नियम
एच-1बी वीजा को लेकर बनाए गए नए नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किए जाएंगे। इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। इमिग्रेशन सर्विसेस के मुताबिक- 2020 के सत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है।
इमिग्रेशन सर्विसेज के निदेशक फ्रांसिस सिस्ना ने बताया, "नए नियमों में सामान्य और स्मार्ट बदलाव किए गए हैं, इससे कंपनियों को काफी फायदा होगा। अमेरिका में नौकरी चाहने वाले विदेशी कर्मचारी और इसके लिए मदद करने वाली एजेंसियां एच-1बी वीजा प्रोग्राम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।"
जनवरी की शुरुआत में ही ट्रम्प ने कहा था कि वह एच-1बी वीजा सिस्टम में बदलाव लाना चाहते हैं ताकि इसके धारक देश में रह सकें और उनके अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का रास्ता आसान हो।
एच-1बी वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जिसकी भारतीय आईटी कंपनियों में काफी मांग है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी एक्सपर्ट्स को अपने यहां नियुक्त करती हैं।
इमिग्रेशन सर्विस का कहना है कि नए रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू होने के बाद नियोक्ताओं कंपनी की समग्र लागत को कम हो जाएगी और सरकार की दक्षता में इजाफा होगा।
सिस्ना कहते हैं, "ट्रम्प एच-1बी की सिलेक्शन प्रोसेस में साधारण सा बदलाव कर आव्रजन प्रणाली को बेहतर करना चाहते हैं। नतीजतन अमेरिकी मास्टर या उच्च डिग्री के साथ विदेशी कर्मचारियों की मांग करने वाली अमेरिकी कंपनियों को एच-1बी वीजा की ज्यादा मांग के लिए लॉटरी से चयन का अधिक मौका मिलेगा।"
एक अप्रैल से लागू होने वाले नए नियमों में इमिग्रेशन सर्विसेस पहले उन एच-1बी आवेदनों को चुनेगा, जिन्हें लाभार्थियों की तरफ से भेजा गया हो। इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें एडवांस्ड डिग्री में छूट मिल सकती है। इसके बाद इमिग्रेशन विभाग बाकी बचे आवेदनों में से चुनेगा।
भगवान अयप्पा सभी हिंदुओं के भगवान
भागवत ने कहा कि अयप्पा केवल केरल के हिंदुओं के भगवान नहीं हैं। यह सभी हिंदुओं के भगवान हैं। इस आंदोलन में पूरा हिंदू समाज शामिल है। संपूर्ण देश में हमें इस मामले को बताकर लोगों को जागरूक करना होगा। हिंदुओं के खिलाफ षडयंत्र चल रहा है। कहीं-कहीं षडयंत्र चल जाता है। उसका कारण हमारी कमियां हैं। पंथ, भाषा, जात-पात के नाम पर कोई व्यक्ति हमें अलग नहीं कर सके। सामाजिक समरसता का काम शुरू होना चाहिए।
केरल सरकार का दावा- 51 महिलाओं को कराया प्रवेश
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के विरोध में राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 2 जनवरी 2019 को 2 महिलाओं ने पहली बार मंदिर में प्रवेश किया। महिलाओं को पुलिस सुरक्षा में पिछले दरवाजे से प्रवेश कराया था। इसके बाद केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि मंदिर में कोर्ट के फैसले के बाद 10 से 50 वर्ष के उम्र की 51 महिलाओं ने प्रवेश किया।
Thursday, January 31, 2019
Wednesday, January 23, 2019
वर्चुअल मॉडल इम्मा की खूबसूरती के लोग कायल, सोशल मीडिया पर 15 हजार फॉलोअर
जापानी सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वर्चुअल मॉडल छाई हुई है। इस खूबसूरत मॉडल का हकीकत में कोई वजूद नहीं है। यह कम्प्यूटर द्वारा बनाई गई एक कृति है। इसका नाम जापानी शब्द इमा (अभी) से प्रेरित होकर इम्मा रखा गया है। इस मॉडल को सीजी मॉडलिंग कंपनी ने बनाया है। इसके सोशल मीडिया पर 15 हजार से ज्यादा फॉलोअर हैं।
इम्मा को पिछले साल बनाया गया
इस मॉडल का फोटो जापानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। पिछले तीन दिन में इसके फॉलोअर दोगुने से ज्यादा बढ़े हैं। इम्मा का परिचय सिर्फ इतना है कि यह एक वर्चुअल मॉडल है।
इम्मा को 3डी तकनीक के जरिए साल 2018 में बनाया गया। यह 2019 में काफी लोकप्रिय हुई। इसे पहली बार सीजी वर्ल्ड मैगेजीन के फरवरी एडिशन में कवर पेज पर जगह मिली। इसके बाद से हर जापानी की जुबान पर इसी का नाम है।
इससे पहले भी सोशल मीडिया पर वर्चुअल मॉडल देखे जाते रहे हैं। इनमें इम्मा अब तक की सबसे ज्यादा मशहूर वर्चुअल मॉडल रही हैं।
स्टॉटन ने कैनेडी के निजी जीवन की फोटो खींचने का प्रस्ताव रखा। कैनेडी ने कहा कि ऐसा कुछ मौकों पर किया जा सकता है। इसी दौरान व्हाइट हाउस के वेस्ट विंग में कैनेडी की अपने बेटे के साथ टहलने की फोटो सामने आई। वाल्श का दावा है कि कैनेडी दंपती ने अपनी छवि को महफूज रखने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाए। मसलन स्वीमिंग पूल में प्रवेश करते हुए राष्ट्रपति का फोटो तब तक नहीं खींचा जाता था, जब तक वे गर्दन तक पानी में नहीं चले जाते थे।
स्टॉटन ने एक और शानदार तस्वीर खींची। 22 नवंबर 1963 को कैनेडी की हत्या हुई। इसके कुछ देर बाद ही तत्कालीन उपराष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने एयरफोर्स वन के ऑफिस में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनके बगल में कैनेडी की पत्नी जैकलीन भी खड़ी थीं। इस फोटो ने साफ कर दिया कि कैनेडी नहीं रहे और लिंडन राष्ट्रपति बन चुके हैं।
जॉनसन ने स्टॉटन को हटाकर अपने साथ काम कर चुके योइची ओकामोता तो व्हाइट हाउस फोटोग्राफी का जिम्मा सौंपा। ओकामोता ने जॉनसन की अपने डॉगी के साथ खेलते, मानवाधिकार नेताओं के साथ बैठक करते, सर्जरी के बाद बिस्तर पर आराम करते हुए जैसी कई फोटो खींचीं।
वहीं, रिचर्ड निक्सन (1969-74) ने अपने फोटोग्राफर ओली एटकिंस के आने पर ही प्रतिबंध लगा दिया। जिमी कार्टर (1977-80) ने कोई फोटोग्राफर हायर ही नहीं किया।
बराक ओबामा ने शिकागो ट्रिब्यून अखबार के लिए काम कर चुके पीट सूजा को व्हाइट हाउस का ऑफिशियल फोटोग्राफर बनाया। सूजा के मुताबिक- ओबामा जानते थे कि एडमिनिस्ट्रेशन के लिए विजुअल रिकॉर्ड (फोटो) की क्या अहमियत है। ओबामा के कार्यकाल के दौरान ली गईं करीब 20 लाख तस्वीरों को नेशनल आर्काइव ने सुरक्षित रखा है।
ट्रम्प के शासनकाल में व्हाइट हाउस के आधिकारिक फोटोग्राफर के पद पर शीला क्रेगहेड हैं। वह इससे पहले लॉरा बुश (जॉर्ज डब्ल्यू बुश की पत्नी), सारा पेलिन (अलास्का की पूर्व गवर्नर) की निजी फोटोग्राफर थीं। ओबामा प्रशासन से तुलना करें तो ट्रम्प की टीम कम तस्वीरें जारी करती है। क्रेगहेड की ज्यादातर तस्वीरें कठोर होती हैं।
इम्मा को पिछले साल बनाया गया
इस मॉडल का फोटो जापानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। पिछले तीन दिन में इसके फॉलोअर दोगुने से ज्यादा बढ़े हैं। इम्मा का परिचय सिर्फ इतना है कि यह एक वर्चुअल मॉडल है।
इम्मा को 3डी तकनीक के जरिए साल 2018 में बनाया गया। यह 2019 में काफी लोकप्रिय हुई। इसे पहली बार सीजी वर्ल्ड मैगेजीन के फरवरी एडिशन में कवर पेज पर जगह मिली। इसके बाद से हर जापानी की जुबान पर इसी का नाम है।
इससे पहले भी सोशल मीडिया पर वर्चुअल मॉडल देखे जाते रहे हैं। इनमें इम्मा अब तक की सबसे ज्यादा मशहूर वर्चुअल मॉडल रही हैं।
स्टॉटन ने कैनेडी के निजी जीवन की फोटो खींचने का प्रस्ताव रखा। कैनेडी ने कहा कि ऐसा कुछ मौकों पर किया जा सकता है। इसी दौरान व्हाइट हाउस के वेस्ट विंग में कैनेडी की अपने बेटे के साथ टहलने की फोटो सामने आई। वाल्श का दावा है कि कैनेडी दंपती ने अपनी छवि को महफूज रखने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाए। मसलन स्वीमिंग पूल में प्रवेश करते हुए राष्ट्रपति का फोटो तब तक नहीं खींचा जाता था, जब तक वे गर्दन तक पानी में नहीं चले जाते थे।
स्टॉटन ने एक और शानदार तस्वीर खींची। 22 नवंबर 1963 को कैनेडी की हत्या हुई। इसके कुछ देर बाद ही तत्कालीन उपराष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने एयरफोर्स वन के ऑफिस में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनके बगल में कैनेडी की पत्नी जैकलीन भी खड़ी थीं। इस फोटो ने साफ कर दिया कि कैनेडी नहीं रहे और लिंडन राष्ट्रपति बन चुके हैं।
जॉनसन ने स्टॉटन को हटाकर अपने साथ काम कर चुके योइची ओकामोता तो व्हाइट हाउस फोटोग्राफी का जिम्मा सौंपा। ओकामोता ने जॉनसन की अपने डॉगी के साथ खेलते, मानवाधिकार नेताओं के साथ बैठक करते, सर्जरी के बाद बिस्तर पर आराम करते हुए जैसी कई फोटो खींचीं।
वहीं, रिचर्ड निक्सन (1969-74) ने अपने फोटोग्राफर ओली एटकिंस के आने पर ही प्रतिबंध लगा दिया। जिमी कार्टर (1977-80) ने कोई फोटोग्राफर हायर ही नहीं किया।
बराक ओबामा ने शिकागो ट्रिब्यून अखबार के लिए काम कर चुके पीट सूजा को व्हाइट हाउस का ऑफिशियल फोटोग्राफर बनाया। सूजा के मुताबिक- ओबामा जानते थे कि एडमिनिस्ट्रेशन के लिए विजुअल रिकॉर्ड (फोटो) की क्या अहमियत है। ओबामा के कार्यकाल के दौरान ली गईं करीब 20 लाख तस्वीरों को नेशनल आर्काइव ने सुरक्षित रखा है।
ट्रम्प के शासनकाल में व्हाइट हाउस के आधिकारिक फोटोग्राफर के पद पर शीला क्रेगहेड हैं। वह इससे पहले लॉरा बुश (जॉर्ज डब्ल्यू बुश की पत्नी), सारा पेलिन (अलास्का की पूर्व गवर्नर) की निजी फोटोग्राफर थीं। ओबामा प्रशासन से तुलना करें तो ट्रम्प की टीम कम तस्वीरें जारी करती है। क्रेगहेड की ज्यादातर तस्वीरें कठोर होती हैं।
Friday, January 11, 2019
पत्रकार की हत्या के मामले में राम रहीम समेत 4 दोषी करार, 17 को सुनाई जाएगी सजा
सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम समेत चार को दोषी करार दिया। 17 जनवरी को चारों को सजा सुनाई जाएगी। 2 जनवरी को सीबीआई कोर्ट ने 16 साल पुराने इस मामले के आरोपी गुरमीत राम रहीम, निर्मल, कुलदीप और किशन लाल को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। फैसला जज जगदीप सिंह ने सुनाया। उन्होंने ही साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को सजा सुनाई थी।
राम रहीम को कम से कम उम्र कैद की सजा सुनाई जा सकती है
पंचकूला कोर्ट में राम रहीम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ। कोर्ट ने राम रहीम और किशन लाल को आईपीसी की धारा 120बी, 302 का दोषी ठहराया। वहीं, कुलदीप और निर्मल को 120बी, 302 और आर्म्स एक्ट का दोषी ठहराया है। धारा 302 में कम से कम उम्र कैद और ज्यादा से ज्यादा फांसी की सजा हो सकती है। फैसले के बाद पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल ने कहा कि हमें लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला। हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से राम रहीम को देखा। उसकी दाढ़ी सफेद हो चुकी है। चेहरा ढल चुका है। उसने पता नहीं कितने गलत काम किए हैं। उसे फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
रामचंद्र के जरिए ही यौन शोषण मामला सामने आया था
साध्वी यौन शोषण मामले में जो लेटर लिखे गए थे, उन्हीं के आधार पर रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में खबरें प्रकाशित की थीं। छत्रपति पर पहले दबाव बनाया गया। जब वे धमकियों के आगे नहीं झुके तो 24 अक्टूबर 2002 को उन पर हमला कर दिया गया। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
ऐसे दिया गया था हत्या को अंजाम
बाइक पर आए कुलदीप ने गोली मारकर रामचंद्र की हत्या कर दी थी। उसके साथ निर्मल भी था। जिस रिवॉल्वर से रामचंद्र पर गोलियां चलाई गईं, उसका लाइसेंस डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर किशन लाल के नाम पर था। गुरमीत राम रहीम पर हत्या की साजिश रचने का आरोप था। राम रहीम फिलहाल दो साध्वियों से यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।
सिरसा-रोहतक में सुरक्षा कड़ी, डेरे के सभी कार्यक्रम रद्द
सुनवाई के मद्देनजर हरियाणा पुलिस ने रोहतक की सुनारिया जेल और सिरसा शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। सिरसा में हरियाणा पुलिस की 12 कंपनियां डेरा सच्चा सौदा से सिरसा शहर तक तैनात की गई हैं। इसके अतिरिक्त 10 डीएसपी, 12 इंस्पेक्टर लगाए गए। डेरा सच्चा सौदा को 14 पुलिस नाकों से घेरा गया है। डेरे में सभी गतिविधियां बंद की गई हैं, उन्हें आदेश दिए गए हैं कि डेरे की वीडियोग्राफी करवाई जाए।
राम रहीम को कम से कम उम्र कैद की सजा सुनाई जा सकती है
पंचकूला कोर्ट में राम रहीम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ। कोर्ट ने राम रहीम और किशन लाल को आईपीसी की धारा 120बी, 302 का दोषी ठहराया। वहीं, कुलदीप और निर्मल को 120बी, 302 और आर्म्स एक्ट का दोषी ठहराया है। धारा 302 में कम से कम उम्र कैद और ज्यादा से ज्यादा फांसी की सजा हो सकती है। फैसले के बाद पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल ने कहा कि हमें लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला। हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से राम रहीम को देखा। उसकी दाढ़ी सफेद हो चुकी है। चेहरा ढल चुका है। उसने पता नहीं कितने गलत काम किए हैं। उसे फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
रामचंद्र के जरिए ही यौन शोषण मामला सामने आया था
साध्वी यौन शोषण मामले में जो लेटर लिखे गए थे, उन्हीं के आधार पर रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में खबरें प्रकाशित की थीं। छत्रपति पर पहले दबाव बनाया गया। जब वे धमकियों के आगे नहीं झुके तो 24 अक्टूबर 2002 को उन पर हमला कर दिया गया। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
ऐसे दिया गया था हत्या को अंजाम
बाइक पर आए कुलदीप ने गोली मारकर रामचंद्र की हत्या कर दी थी। उसके साथ निर्मल भी था। जिस रिवॉल्वर से रामचंद्र पर गोलियां चलाई गईं, उसका लाइसेंस डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर किशन लाल के नाम पर था। गुरमीत राम रहीम पर हत्या की साजिश रचने का आरोप था। राम रहीम फिलहाल दो साध्वियों से यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।
सिरसा-रोहतक में सुरक्षा कड़ी, डेरे के सभी कार्यक्रम रद्द
सुनवाई के मद्देनजर हरियाणा पुलिस ने रोहतक की सुनारिया जेल और सिरसा शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। सिरसा में हरियाणा पुलिस की 12 कंपनियां डेरा सच्चा सौदा से सिरसा शहर तक तैनात की गई हैं। इसके अतिरिक्त 10 डीएसपी, 12 इंस्पेक्टर लगाए गए। डेरा सच्चा सौदा को 14 पुलिस नाकों से घेरा गया है। डेरे में सभी गतिविधियां बंद की गई हैं, उन्हें आदेश दिए गए हैं कि डेरे की वीडियोग्राफी करवाई जाए।
Sunday, January 6, 2019
इस्लाम त्याग भाग रही लड़की, सऊदी अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर 'पकड़ा'
सऊदी अरब की एक युवती ने बताया है कि वह बैंकॉक के मुख्य एयरपोर्ट में फंस गई है. युवती के अनुसार वह अपने परिवार से दूर भागकर ऑस्ट्रेलिया जाने की कोशिश कर रही थी.
राहफ़ मोहम्मद अल क़ुनन नामक इस युवती की उम्र 18 साल है. मोहम्मद अल-क़ुनन ने बीबीसी को बताया कि वह अपने परिवार के साथ कुवैत की यात्रा पर थीं.
दो दिन पहले उन्होंने कुवैत से ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए फ्लाइट पकड़ी थी. बैंकॉक से उन्हें ऑस्ट्रेलिया की फ़्लाइट लेनी थी.
मोहम्मद अल-क़ुनन ने आरोप लगाया है कि सऊदी के अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट भी ज़ब्त कर लिया.
हालांकि बैंकॉक में मौजूद सऊदी अधिकारियों का कहना है कि युवती के पास वापसी का टिकट नहीं था, इसलिए उन्हें रोका गया है.
मोहम्मद अल-क़ुनन ने बताया कि उन्होंने इस्लाम त्याग दिया है और अब उन्हें डर है कि उन्हें ज़बरदस्ती सऊदी अरब ले जाया जाएगा जहां उनका परिवार उनकी हत्या कर देगा.
बैंकॉक में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड ने बताया है कि मोहम्मद अल-क़ुनन बहुत घबराई हुई हैं.
मोहम्मद अल-क़ुनन के अनुसार उनके पास एक ऑस्ट्रेलियाई वीजा है लेकिन सऊदी के एक राजनयिक ने उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया है.
वहीं बैंकॉक में सऊदी दूतावास के अधिकारियों का कहना है युवती को एयरपोर्ट पर इसलिए रोका गया "क्योंकि उनके पास वापसी का टिकट नहीं था और उन्हें सोमवार को कुबैत वापस भेज दिया जाएगा, जहां उनके परिवार मौजूद हैं."
एक बयान में सऊदी अधिकारियों का कहना है कि "उन्हें बैंकॉक में किसी को रोकने का अधिकार नहीं है." दूतावास युवती के पिता से संपर्क में है.
बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़आवर में मोहम्मद अल-क़ुनन ने बताया कि वे इस समय ट्रांज़िट इलाके के एक होटल में हैं. वे लगातार इस मामले पर ट्वीट कर रही हैं.
उन्होंने बताया, ''मैंने अपनी कहानी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं. इस वजह से मेरे पिता मुझसे बहुत ज़्यादा नाराज़ हैं. मैं अपने देश में पढ़ाई या नौकरी नहीं कर सकती. मैं आज़ाद होना चाहती हूं, पढ़ना और नौकरी करना चाहती हूं.''
मोहम्मद अल-क़ुनन ने एक ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें बताया गया है कि होटल में उनके कमरे के बाहर चार लोग मौजूद हैं, वे लोग यह सुनिश्चित करने के लिए खड़ें हैं कि मोहम्मद अल-क़ुनन होटल छोड़कर ना चली जाएं.
वहीं दूसरी तरफ थाईलैंड पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अल-क़ुनन एक शादी से भाग रही थीं.
थाईलैंड पुलिस के मेजर जनरल सुराछते हकपर्न ने बीबीसी से कहा कि मोहम्मद अल-क़ुनन के पास थाईलैंड में प्रवेश करने का वीज़ा नहीं था, इसीलिए पुलिस ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया.
पुलिस मोहम्मद अल-क़ुनन को क़ुवैत एयरलाइंस के ज़रिए वापस उनके देश भेजने की कोशिश कर रही है.
हालांकि मेजर जनरल सुराछते ने कहा है कि उन्हें मोहम्मद अल-क़ुनन का पासपोर्ट ज़ब्त होने की बात मालूम नहीं है.
इस बीच पुलिस यह बात समझाने में असफल रही है कि जब मोहम्मद अल-क़ुनन थाईलैंड के रास्ते ऑस्ट्रेलिया जा रही थीं और उनके पास ऑस्ट्रेलियाई वीज़ा भी था तो ऐसे में उन्हें थाईलैंड का वीज़ा रखने ज़रूरत क्यों होती.
ग़ौर करने वाली बात यह भी यह भी है कि सऊदी के नागरिक जब थाईलैंड जाते हैं तो वे थाईलैंड पहुंचने के बाद भी अपने लिए वीज़ा का आवेदन कर सकते हैं.
राहफ़ मोहम्मद अल क़ुनन नामक इस युवती की उम्र 18 साल है. मोहम्मद अल-क़ुनन ने बीबीसी को बताया कि वह अपने परिवार के साथ कुवैत की यात्रा पर थीं.
दो दिन पहले उन्होंने कुवैत से ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए फ्लाइट पकड़ी थी. बैंकॉक से उन्हें ऑस्ट्रेलिया की फ़्लाइट लेनी थी.
मोहम्मद अल-क़ुनन ने आरोप लगाया है कि सऊदी के अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट भी ज़ब्त कर लिया.
हालांकि बैंकॉक में मौजूद सऊदी अधिकारियों का कहना है कि युवती के पास वापसी का टिकट नहीं था, इसलिए उन्हें रोका गया है.
मोहम्मद अल-क़ुनन ने बताया कि उन्होंने इस्लाम त्याग दिया है और अब उन्हें डर है कि उन्हें ज़बरदस्ती सऊदी अरब ले जाया जाएगा जहां उनका परिवार उनकी हत्या कर देगा.
बैंकॉक में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड ने बताया है कि मोहम्मद अल-क़ुनन बहुत घबराई हुई हैं.
मोहम्मद अल-क़ुनन के अनुसार उनके पास एक ऑस्ट्रेलियाई वीजा है लेकिन सऊदी के एक राजनयिक ने उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया है.
वहीं बैंकॉक में सऊदी दूतावास के अधिकारियों का कहना है युवती को एयरपोर्ट पर इसलिए रोका गया "क्योंकि उनके पास वापसी का टिकट नहीं था और उन्हें सोमवार को कुबैत वापस भेज दिया जाएगा, जहां उनके परिवार मौजूद हैं."
एक बयान में सऊदी अधिकारियों का कहना है कि "उन्हें बैंकॉक में किसी को रोकने का अधिकार नहीं है." दूतावास युवती के पिता से संपर्क में है.
बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़आवर में मोहम्मद अल-क़ुनन ने बताया कि वे इस समय ट्रांज़िट इलाके के एक होटल में हैं. वे लगातार इस मामले पर ट्वीट कर रही हैं.
उन्होंने बताया, ''मैंने अपनी कहानी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं. इस वजह से मेरे पिता मुझसे बहुत ज़्यादा नाराज़ हैं. मैं अपने देश में पढ़ाई या नौकरी नहीं कर सकती. मैं आज़ाद होना चाहती हूं, पढ़ना और नौकरी करना चाहती हूं.''
मोहम्मद अल-क़ुनन ने एक ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें बताया गया है कि होटल में उनके कमरे के बाहर चार लोग मौजूद हैं, वे लोग यह सुनिश्चित करने के लिए खड़ें हैं कि मोहम्मद अल-क़ुनन होटल छोड़कर ना चली जाएं.
वहीं दूसरी तरफ थाईलैंड पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अल-क़ुनन एक शादी से भाग रही थीं.
थाईलैंड पुलिस के मेजर जनरल सुराछते हकपर्न ने बीबीसी से कहा कि मोहम्मद अल-क़ुनन के पास थाईलैंड में प्रवेश करने का वीज़ा नहीं था, इसीलिए पुलिस ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया.
पुलिस मोहम्मद अल-क़ुनन को क़ुवैत एयरलाइंस के ज़रिए वापस उनके देश भेजने की कोशिश कर रही है.
हालांकि मेजर जनरल सुराछते ने कहा है कि उन्हें मोहम्मद अल-क़ुनन का पासपोर्ट ज़ब्त होने की बात मालूम नहीं है.
इस बीच पुलिस यह बात समझाने में असफल रही है कि जब मोहम्मद अल-क़ुनन थाईलैंड के रास्ते ऑस्ट्रेलिया जा रही थीं और उनके पास ऑस्ट्रेलियाई वीज़ा भी था तो ऐसे में उन्हें थाईलैंड का वीज़ा रखने ज़रूरत क्यों होती.
ग़ौर करने वाली बात यह भी यह भी है कि सऊदी के नागरिक जब थाईलैंड जाते हैं तो वे थाईलैंड पहुंचने के बाद भी अपने लिए वीज़ा का आवेदन कर सकते हैं.
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