Thursday, January 31, 2019

भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, एच-1बी वीजा के लिए अमेरिकी संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त विदेशियों को प्राथमिकता

अमेरिका से उच्च शिक्षा पाने वाले विदेशी कामगारों को मौका देने के तहत ट्रम्प प्रशासन ने बुधवार को एच-1बी वीजा आवेदन से संबंधित नई नीति की औपचारिक घोषणा की है। कहा गया है कि नई नीति ज्यादा सक्षम, प्रभावी है और यह योग्य लोगों को अमेरिका में आकर्षित करने में कामयाब रहेगी। अंतिम नियम उस आदेश को पलट देगा जिसके अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) नियमित कैप और एडवांस डिग्री छूट के तहत एच-1बी अर्जियों का चयन करती थी।

फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होंगे नियम
एच-1बी वीजा को लेकर बनाए गए नए नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किए जाएंगे। इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। इमिग्रेशन सर्विसेस के मुताबिक- 2020 के सत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है।

इमिग्रेशन सर्विसेज के निदेशक फ्रांसिस सिस्ना ने बताया, "नए नियमों में सामान्य और स्मार्ट बदलाव किए गए हैं, इससे कंपनियों को काफी फायदा होगा। अमेरिका में नौकरी चाहने वाले विदेशी कर्मचारी और इसके लिए मदद करने वाली एजेंसियां एच-1बी वीजा प्रोग्राम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।"

जनवरी की शुरुआत में ही ट्रम्प ने कहा था कि वह एच-1बी वीजा सिस्टम में बदलाव लाना चाहते हैं ताकि इसके धारक देश में रह सकें और उनके अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का रास्ता आसान हो।

एच-1बी वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जिसकी भारतीय आईटी कंपनियों में काफी मांग है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी एक्सपर्ट्स को अपने यहां नियुक्त करती हैं।

इमिग्रेशन सर्विस का कहना है कि नए रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू होने के बाद नियोक्ताओं कंपनी की समग्र लागत को कम हो जाएगी और सरकार की दक्षता में इजाफा होगा।

सिस्ना कहते हैं, "ट्रम्प एच-1बी की सिलेक्शन प्रोसेस में साधारण सा बदलाव कर आव्रजन प्रणाली को बेहतर करना चाहते हैं। नतीजतन अमेरिकी मास्टर या उच्च डिग्री के साथ विदेशी कर्मचारियों की मांग करने वाली अमेरिकी कंपनियों को एच-1बी वीजा की ज्यादा मांग के लिए लॉटरी से चयन का अधिक मौका मिलेगा।"

एक अप्रैल से लागू होने वाले नए नियमों में इमिग्रेशन सर्विसेस पहले उन एच-1बी आवेदनों को चुनेगा, जिन्हें लाभार्थियों की तरफ से भेजा गया हो। इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें एडवांस्ड डिग्री में छूट मिल सकती है। इसके बाद इमिग्रेशन विभाग बाकी बचे आवेदनों में से चुनेगा।

भगवान अयप्पा सभी हिंदुओं के भगवान
भागवत ने कहा कि अयप्पा केवल केरल के हिंदुओं के भगवान नहीं हैं। यह सभी हिंदुओं के भगवान हैं। इस आंदोलन में पूरा हिंदू समाज शामिल है। संपूर्ण देश में हमें इस मामले को बताकर लोगों को जागरूक करना होगा। हिंदुओं के खिलाफ षडयंत्र चल रहा है। कहीं-कहीं षडयंत्र चल जाता है। उसका कारण हमारी कमियां हैं। पंथ, भाषा, जात-पात के नाम पर कोई व्यक्ति हमें अलग नहीं कर सके। सामाजिक समरसता का काम शुरू होना चाहिए।

केरल सरकार का दावा- 51 महिलाओं को कराया प्रवेश
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के विरोध में राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 2 जनवरी 2019 को 2 महिलाओं ने पहली बार मंदिर में प्रवेश किया। महिलाओं को पुलिस सुरक्षा में पिछले दरवाजे से प्रवेश कराया था। इसके बाद केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि मंदिर में कोर्ट के फैसले के बाद 10 से 50 वर्ष के उम्र की 51 महिलाओं ने प्रवेश किया।

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