Wednesday, May 29, 2019

सचिन पायलट के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में से एक पद से इस्तीफे की संभावना

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर कांग्रेस की हार के बाद सचिन पायलट राज्य के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में से कोई एक पद छोड़ सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लगातार तीसरे दिन मिलने का वक्त नहीं दिया। पायलट से भी पिछले तीन दिनों से मुलाकात नहीं की। हालांकि, सूत्र कहते हैं कि गहलोत अब तक तीन बार राहुल से मिल चुके हैं। लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। दोनों नेता बुधवार को राज्य कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने जयपुर लौट आए हैं।

दरअसल, राहुल ने पिछले शनिवार सीडब्ल्यूसी की बैठक में कहा था कि कुछ नेताओं ने सिर्फ बेटों के चुनाव प्रचार पर ध्यान दिया। इशारा गहलोत की तरफ माना गया। गहलोत के बेटे वैभव जोधपुर से चुनाव मैदान में थे। कहा गया कि लोकसभा चुनाव के दौरान गहलोत ने राजस्थान में 130 सभाएं और रोड शो किए। इनमें से 93 सभाएं उन्होंने बेटे के लिए कीं। हालांकि, बुधवार को राजस्थान कांग्रेस की तरफ से स्पष्टीकरण आया कि गहलोत ने 104 सभाएं कीं। हर लोकसभा क्षेत्र में प्रचार किया। वे 23 प्रत्याशियों के नामांकन में भी गए। यह सच है कि जिन तीन नेताओं के बेटों के टिकट पर सवाल उठ रहे हैं, उनमें कमलनाथ और पी. चिदंबरम के बेटे चुनाव जीत गए हैं। अकेले गहलोत के बेटे को ही करारी हार मिली है।

राजस्थान कांग्रेस में गहलोत का विरोध तेज हुआ
पिछले दिनों राजस्थान के चार मंत्रियों ने चुनावी हार की समीक्षा पर जोर दिया था और गहलोत का नाम लिए बिना कहा था कि हार की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसके बाद मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश सचिव सुशील आसोपा ने फेसबुक पर लिखा कि पायलट को सीएम नहीं बनाना प्रदेश में कांग्रेस की हार की वजह है। अगर पायलट सीएम होते तो लोकसभा के परिणाम कुछ और होते। उधर, हनुमानगढ़ के कांग्रेस जिलाध्यक्ष केसी बिश्नोई ने कहा कि हार की जिम्मेदारी गहलोत को लेनी चाहिए।


राजस्थान में दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव थे। वहीं, पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे। पार्टी ने दोनों के ही नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा। 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की अभी 100 सीटें हैं। भाजपा के 73 विधायक हैं। चुनाव में जीत के बाद गहलोत मुख्यमंत्री बने। पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। सरकार को बसपा के 6 विधायकों से समर्थन मिला हुआ है।

कोलकाता. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में जाने से इनकार कर दिया है। पहले उन्होंने कहा था कि वे इस औपचारिक समारोह में हिस्सा लेंगी। ममता ने बुधवार को कहा कि वे शपथ ग्रहण में जाने का मन बना चुकी थीं, लेकिन पिछले कुछ घंटों के दौरान सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स को देखने के बाद उन्होंने मन बदल लिया। ममता ने कहा कि रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बंगाल में हिंसा के दौरान 54 लोगों की जान गई। भाजपा का यह दावा पूरी तरह से गलत है। ममता ने कहा- मोदीजी मैं माफी चाहती हूं, मैं समारोह में नहीं आ सकती।

उधर, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन भी शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे। नरेंद्र मोदी 30 मई को राष्ट्रपति भवन में दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। 

बंगाल में हत्याओं का राजनीति से संबंध नहीं- ममता

ममता ने एक पत्र के जरिए शपथ ग्रहण में शामिल न होने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी बधाई। मेरी योजना थी कि आपका न्योता स्वीकार करूं और शपथ ग्रहण समारोह में आऊं। हालांकि, पिछले एक घंटे से मीडिया रिपोर्ट में भाजपा दावा कर रही है कि बंगाल में 54 लोगों की राजनीतिक हिंसा के दौरान हत्या हुई। यह पूरी तरह से गलत है। बंगाल में कोई भी राजनीतिक हत्या नहीं हुई। ये निजी वैमनस्य, पारवारिक कलह और ऐसे ही दूसरे विवादों के चलते हुई हैं। इनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है और न ही हमारे पास ऐसा कोई साक्ष्य है। ऐसे में मैं बाध्य हूं कि शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ना लूं। नरेंद्र मोदीजी मैं माफी चाहती हूं।

ममता ने लिखा- शपथ ग्रहण लोकतंत्र को मनाने का गरिमामय मौका होता है। यह ऐसा मौका नहीं होता है, जिसकी गरिमा को कोई दल अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करके कम कर दे। मुझे माफ करें।

हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिवार शपथग्रहण में शामिल होंगे

मोदी ने बंगाल हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार को भी शपथग्रहण में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता मनु हंसदा, चंदन शॉ और संतू घोष की हत्या कर दी गई।

पश्चिम बंगाल में मिदनापुर के भाजपा कार्यकर्ता मनु हंसदा की हत्या कर दी गई थी। मनु के बेटे ने मोदी के शपथग्रहण में शामिल होने के सवाल पर कहा- "मेरे पिता को टीएमसी के गुंडों ने मार डाला। अब हमारे इलाके में शांति है। हम खुश हैं कि हम दिल्ली जा रहे हैं।" मिदनापुर लोकसभा सीट से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल के उम्मीदवार मानस भूनिया को हराया।

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